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Wednesday, October 15, 2014

आराम । (गज़लनुमा गीत)

आराम ।  
(गज़लनुमा गीत)


 चल ज़िंदगी,तुझ को नया इक नाम  दें ।
  इस    रूह  को   अब   जरा   आराम  दें ।

१.  
रितुओं  की   तरह,   आते  -  जाते   रहे..!
 उन    ज़ख़मों  को,   अहम     इनाम  दें ।
चल ज़िंदगी,तुझ को नया इक नाम  दें ।

२.  
तुझ  से  बिछड़ना ? ग़म  तो  है,  मगर..!
चंद    पल   हमें,   तनहा,  गुमनाम  दें ।
चल ज़िंदगी,तुझ को नया इक नाम  दें ।
 
३.  
इस  भीड़ में, मिले न कभी, हम से हम..!
ऐसे    रिश्ते  को   सरपट   अन्जाम  दें ।
चल ज़िंदगी,तुझ को नया इक नाम  दें ।
      
सरपट = तेज़,
 
४.  
रुकती  ये   धड़कन,  थमती  ये   सांसें..!
इस    जश्‍न   को,   अनवर   कलाम  दें ।
  चल ज़िंदगी,  तुझ को नया इक नाम  दें ।

     अनवर = श्रेष्ठ, कलाम = जुमला,

     मार्कण्ड दवे । 
दिनांक-१५-१०-२०१४.



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